Tuesday, July 30, 2019

हैप्पी फ्रेंड शिप डे क्या होता हैं जाने इन दो लाइनों में

हेल्लो दोस्तों कैसे हैं आप सब लोग मै हूं आपका दोस्त दिलीप सिंह उर्फ सिंह साहेब ! उम्मीद करता हूं आप सब लोग अच्छे होंगे , दोस्तों आने वाला हैं फ्रेंड शिप डे 2019 ये मौका मिला है अगस्त के पहले सन्डे को ही , क्या हम दोस्तों के बिना रह सकते है , नहीं नहीं कभी नहीं रह सकते , दोस्तों के बिना तो  कभी नहीं रह सकते , कियू की दोस्ती का रिश्ता भले ही खून का नहीं होता , पर जो मुसीबत के समय साथ दे वो दोस्त ही होता हैं जो हमारा साथ देता हैं , दोस्ती का रिश्ता तो खून से भी बढ़कर होता है,
आज की इस दुनिया मै दोस्त से बढ़कर ओर कोई नहीं लगता !
जरा सोचिए अगर लाइफ मै दोस्त ना हो तो क्या होगा, जैसे आत्मा इधर उधर भटकती हो ऐसी हो जाती हैं, जिस तरह  खाने के  के बिना नहीं रह सकते , उसी तरह दोस्तों के बिना भी हम नहीं रह सकते है, 


दोस्तो ये फ्रेंड शिप डे कियू मनाते हैं??
दोस्तों ये फ्रेंड शिप डे की सुरूआत होती हैं साल 1919 में हॉलमार्क कार्ड के सस्थापक जोस होल के सुझाव से हुई थी, के जिसको हम करीब करीब  दुनिया के सारे देश में मनाते हैं
 अब बात आती हैं की इसको हम हर साल अगस्त के पहले ही सन्डे को ही कियू मनाते है ,
1935 मै युनाइटेड स्टेट्स कांग्रेस ने इसको अगस्त के फर्स्ट सन्डे को ही मनाने को घोसित क्या गया था ! इसको पहली बार अमेरिका मै मनाया गया था



क्या दोस्त होना जरूरी है???
जरा सोचिए अगर आपकी जिंदगी में कोई दोस्त नहीं होगा , तो आप  क्या करेंगे , जिंदगी कितनी बोरिंग लगेगी ना , 
चलो दोस्तों मै मेरी खुद की रियल स्टोरी बताता हूं , दोस्त भले ही कमिने हो पर दोस्त के छोड़ कर चले जाने पर तो बहुत दुख होता है , 
दोस्तो ये कहानी हैं सोनू रावत की जो एक शॉप पर काम करता हैं, ओर उसके बहुत सारे दोस्त बन जाते है , पर उसके गांव वाला उस शॉप पर कोई नहीं काम करता पर फिर भी सोनू की सबसे अच्छी दोस्ती हो गई थी !
पर क्या कोई ना कोई तो खराब निकल ही जाता हैं, उसी शॉप पर एक लड़का नाम था राजू  भी काम करता था , पर उस उस राजू से सोनू की बिल्कुल भी नहीं बनती   थी, हमेशा  दोनों मै झगड़ा होता था पर कभी ये नहीं हुआ कि झगड़ा करने के बाद सोनू या राजू बोले ना हो , दोनों झगड़ा  करते भी थें , पर वापस बोल भी जाते थे ! 
पर एक दिन ऐसा आ गया कि राजू नौकरी छोड़कर जा रहा था , ओर सोनू से बोला अच्छा सोनू अब मैं चलता हूं , सोनू की आंखो में आंसु आने लग गए , कुछ बोल तो नहीं पाया पर मन ही मन में सोनू को रोना आ रहा था , 
ओर राजू सोनू से हाथ मिलाया मिलाकर चला जाता हैं , पर सोनू की नजर उसपे की उसपे टिकी रह जाती हैं , ओर मन ही मन में बहुत पछतावा भी हो रहा था, की दोस्त चाहे कैसा भी था पर बंधा एक धम मस्त था , ये बात सोनू नहीं सोनू का दिल कह रहा था, कियू की दोस्त ने कुछ कहा होगा तो दोस्त से कुछ गलती हुई होंगी तभी कुछ कहा होगा वरना बेवजह कोई कुछ नहीं कहता,
दोस्तों मैं तो आपको इस ब्लॉग मै यहीं कहूंगा कि अगर सामने वाला बंदा हमें गाली दे रहा हैं या डाट रहा हैं , तो बुरा नहीं माने कियू की , कुछ कह रहा है तो उसमे हमारी कही ना कही कमी है , ओर उस कमी में सुधार लाने की कोशिश करनी चाहिए , ना कि सामने वाले से झगड़ा ! 
दोस्तों अगर आपको मेरा ब्लॉग पसंद आया हो तो कॉमेंट में लाइक जरुर लिखना !
ओर अगर आपका कोई भी इस ब्लॉग के  के बारे में सवाल हो तो भी आप कॉमेंट जरूर करना ! हम आपके सवाल का जवाब जरूर रिप्लाई करेंगे !
 तो फ्रेंड्स अज के ब्लॉग में इतना ही मिलते हैं जल्द ही किसी नेक्स्ट ब्लॉग में जब तक के लिए
""""जय हिन्द वन्दे मातरम्""""""


       

1 comment:

Good night Friends

Dosto abhi just phucha hu jodhpur to thkha huaa hu so good night and Sweet Dreams for you  Or aap SB log kaise hai com. Jarur krna  ...