Singh is king Rawat
दोस्तो मेरे यहां पर आपको विलेज लाइफ स्टाइल के बारे जानकारी मिलेगी, गांव में कैसे रहते हैं , गांव में कितने घंटे सोते हैं, कितने घंटे काम करते हैं, ओर भी आपको में यहां पर गांव कि रियल लाइफ पर जो स्टोरी होती हैं , वो भी आपको यहां पर मिलेंगी, ओर कोई छोटी मोटी टेक्नोलॉजी से रिलेटेड आर्टिकल्स भी आपको यहां पर मिलेंगे
Monday, October 21, 2019
Wednesday, September 25, 2019
Realme 5 best price वेरी नाइस मोबाइल
Realme 5 अब तक सबसे अच्छा फोन लगा मुझे जिसमें आपको मिल जाते हैं,, बहुत ही अलग ओर खतरनाक फीचर्स जो अब तक के सबसे धासू लगें हैं मुझे तो,
ओर प्राइस कि बात करे तो इस प्राइस में हर कोई खरीदना चाहेगा तो फिर देर किस बात शुरू करते हैं आज का ब्लॉग बने रहिए हमारे साथ एंड तक !!!
हैलो दोस्तों कैसे हैं आप सब लोग में हूं आपका दोस्त दिलीप सिंह उर्फ सिंह साहेब उम्मीद करता हूं आप सब अच्छे होंगे ओर मेरा ब्लॉग आपको पसंद आएगा !!!
दोस्तों अगर आप एक नया मोबाइल खरीदना चाहते हैं तो मेरे हिसाब से realme 5 से बढ़कर आपके सामने ओर कोई फोन नहीं होगा !!!!
कियू कि Realme 5 में जो आपको फीचर्स मिलेगे वो ओर किसी फोन में नहीं मिलेंगे ,,,, मिल तो जाएंगे पर उस प्राइस मैं आपको नहीं मिलेगा अगर कोई 10,000 से 12,000 के बीच फोन लेना चाह रहे हैं तो आपके लिए ये ही फोन सबसे बेस्ट रहेगा !!!!!
अब बात करते हैं कितनी इसकी बैटरी होती हैं ओर कितनी इसकी रेम ओर प्राइस , एंड स्टोरेज कितना होता हैं ????
इसमें फ्रेंड्स आपको तीन केटेगरी मिल जाती जिसमें आपको अलग अलग प्राइस ओर अलग अलग रेम ओर स्टोरेज सब में अलग मिल जाता हैं ओर प्राइस का ज्यादा डिफरेंस नहीं होता हैं ओनली 1000 का ही होता हैं !!!
इन तीनों केटेगरी में रेम स्टोरेज कितना मिल जाता हैं ???
सबसे पहले स्टार्ट होता हैं 3 RAM के साथ ओर आपको यहां पर स्टोरेज मिल जाता हैं 32 GB जो बहुत ही कम कीमत में आपको मिल जाता हैं अगर आप ऑनलाइन शॉपिंग करते हैं तो आपको ओनली ऑन 9999 मिल जाता हैं जो कि बहुत ही कम कीमत हैं !!!
ओर अगर हम तीनों केटेगरी कि बात करें तो आपको सभी फोन में सब कुछ सैम ही मिल जाता बस आपको यहां पर रेम ओर स्टोरेज क्षमता सेम नहीं मिलता हैं !!!!
आपको इन तीनों में सेम क्या क्या मिल जाता हैं ???
Battry आपको सेम मिल जाती हैं जो सबसे अच्छी बात है , आपको यहां पर कैमरा भी सेम ही मिल जाता कहने का तात्पर्य यही हैं,
इन तीनों केटेगरी में रेम ओर स्टोरेज के अलावा सब सेम ही मिल जाता हैं ! जो एक बहुत ही अच्छी बात है !!
Price and Rem, battrey, camra Realme 5 phone
3 RAM 32 storage price 9999
4 RAM 64 storage price। 10,990
4 RAM 128 storage orice। 11,999
Battrey इसमें आपको सेम मिलती हैं
Battrey jo ab tk ki sbse dhasu hai। 5000 MAH
अब बात करते हैं camera ki ओर camera भी आपको यहां सेम ही मिलता हैं
Camera 12 MP + 8 MP + 2 MP +2 MP and frount आपको यहां पर मिलता हैं 13 MP
And Display 16.51CM ( 6.5 ) inch HD Disply
अब बात करते हैं क्या के इस रेंज में ये मोबाइल सही हैं ??
Ans. जी हां बिल्कुल सही हैं इस रेंज में No dout
Monday, September 23, 2019
कितने अच्छे होते हैं दोस्त
मेरे प्यारे दोस्त तेरे लिए ये एक छोटा सा ब्लॉग लिख रहा हूं कोई गलती हो तो माफ़ करना यारा कियू कि दोस्त तू मेरी जिंदगी हैं ,,, ओर मेरी गलती तू ही माफ़ नहीं करेगा तो ओर कोन करेगा !
ओर तेरे लिए तो जान भी कुर्बान कियू कि तू मेरा एक इकलौता दोस्त हैं जो बिना स्वार्थ के दोस्ती को तू निभा रहा !
आज कि इस दुनिया में हर एक दोस्ती के पीछे कुछ ना कुछ स्वार्थ जरूर होता हैं ,,,,,। पर तू। मेरा एक इकलौता दोस्त हैं जो नहीं तो तेरा कोई स्वार्थ है !
मेरी दोस्ती के पीछे ओर,,, ना मेरा कोई स्वार्थ हैं तेरी दोस्ती के पीछे ,,,,, दोस्ती भी तो यहीं होती हैं जिसके पीछे कोई मकसद ना हो !!!
वरना मैं सच कहता हूं आज इस दुनिया में बहुत कम ही ऐसे लोग होंगे जो सिर्फ ओर सिर्फ अपनी दोस्ती निभाते है ,,, वरना सभी के पीछे कुछ ना कुछ मकसद जरूर होता हैं !!!
ऐ दोस्त मेरे से दूर जरूर हैं पर मेंरी जिंदगी दूर थोड़े ही तू मेरे दिल में है और दिल में ही रखूंगा अगर तुझे कभी सुबह गुड मॉर्निंग का मेसेज ना मिले तो नाराज मत होना """" कियू कि इस भाग दौड़ भरी जिंदगी में कभी मेसेज ना कर पाऊं तो माफ़ करना ऐ मेरे प्यारे दोस्त """"
तेरे साथ भले ही मेरा खून का रिश्ता नहीं हैं पर तू मेरा दोस्त हैं वो ही काफी हैं मेरे लिए तो""""""।
कियू कि जरूरी नहीं होता जिसकी रगो में अपना खून हो वो ही अपना दोस्त हो """ कियू कि दोस्त कभी अपना देख कर नहीं बनाया जाता हैं उसका बस नेचर देख कर बनाया जाता हैं """
ओर ऐ मेरे प्यारे दोस्त तुझे भी जब दोस्त बनाया था तब तेरी सकल को देखकर कर नहीं तेरी अकल को देखकर बनाया !!!!!
स्वार्थ
Saturday, September 21, 2019
एक मां अपनी बेटी से कितना प्यार करती है ?
एक मां अपनी बेटी से कितना प्यार करती है ? जानिए मेरे इस ब्लॉग में !
उम्मीद करूंगा मेरा ब्लॉग आपको पसंद आएगा , फ्रेंड्स आज कि इस दुनिया में कोई किसी का नहीं होता हैं , ओर अगर एक मां कि बात करें तो कि अपनी बेटी से कितना प्यार करती है ? बड़ा अजीब सवाल लगता हैं कि ये कैसा सवाल पूछ रहे हो भाई !
पर आज में आपको जो भी इस ब्लॉग में बताऊंगा वो बिल्कुल ही सच बताऊंगा ओर एक गांव कि रियल स्टोरी पर आधारित हैं , ओर इससे पहले भी में एक ब्लॉग बना चुका हूं अगर आपने नहीं देखा है तो इससे पहले वाला ब्लॉग भी पढ़ें ताकि आपको यहां पर रियल स्टोरी के बारे में अच्छे से समझ में आ सके !
हैलो दोस्तो कैसे है आप सब लोग में हूं आपका दोस्त दिलीप सिंह उर्फ सिंह साहेब उम्मीद करता हूं फ्रेंड्स आप सब लोग अच्छे होंगे !
दोस्तो कहानी चल रही हैं निर्मला कि जो एक नॉर्मल फैमिली से होती हैं ओर शादी हो जाती हैं और निर्मला उसकी सास से परेशान नहीं होती बल्कि अपनी मां से ही परेशान हो जाती हैं इसी के बारे में कहानी चल रही है !
एक दिन निर्मला कि मां अपने ही गांव में किसी कि डैथ हो जाती हैं , ओर वहां पर चली जाती हैं ओर निर्मला घर पर रहती है वैसे तो निर्मला अपना काम खुद ही करती हैं ओर अपना घर का काम काज भी करती रहती हैं , पर उस दिन निर्मला का कुछ काम छूट गया था और घर पर रह गई थी और वो काम उसकी भाभीजी ने कर दिया !
अब निर्मला कि मां आयी ओर बोली ये काम नहीं क्या वो काम नहीं क्या तो फिर कर क्या रही थी तू """"
ओर उसका जवाब निर्मला पास नहीं था क़ियूकि उस दिन निर्मला अपना खुद का ही कुछ पर्सनल काम करने में बिजी हो गई थीं और मा का काम भूल गई पर वो काम तो निर्मला कि भाभीजी ने कर दिया पर फिर भी निर्मला को दो बात सुनानी थीं तो उसकी मां ने इधर उधर कि बात करके निर्मला को सुना ही दी थी """""
अब निर्मला जो काम नहीं कर सकती वो भी काम करवाने लगीं उसकी मां तो निर्मला ने साफ कह दिया कि इस चीज से मुझे परेशानी होती हैं और ये काम में नहीं कर सकतीं !
काम क्या था ???
गांव में क्या होता हैं कि जब भी किसी डैथ होती हैं ओर उसके घर पर जाकर आते है या फिर शमशान में जाकर आते है तो वापस आकर स्नान करना होता है ये शहरों में भी होता ही है पर गावों में बहुत ज्यादा होता अगर उसके घर पर भी चले जाते है तो नहाकर आते है !
ओर इसी कारण से निर्मला कि मा ने बोला मेरे कपड़े धो लें ,, निर्मला को बोला"""" पर निर्मला ने मना कर दिया कि में ये कपड़े नहीं धो सकती कियू कि ये कपड़े डैथ वालो के घर पर जाकर आए हो इसलिए में नहीं धो सकतीं !
नहीं धोने क्या कारण था ?
निर्मला बचपन से बहुत ज्यादा कमजोर ओर थकी हुई थी और उसको जीवनदान मिला हुआ था !
किसी देवता ने उसको मरते मरते बचाया था ओर कुछ वचन दे रखे थे जैसे दाग पर जाकर आए हुए के कपड़े नहीं धोने मरे हुए आदमी के घर का खाना नहीं खाना ओर बहुत कुछ देवताओं के वचन थे ओर देवता कि वजह से ही निर्मला आज जिंदा हैं !
ओर निर्मला नहीं चाहतीं थीं कि उसको किसी दिखत का Samna krna पड़े ओर इसी वजह से उसने अपनी मां को कपड़े धोने से इंकार कर दिया पर ये सब कुछ Nirmal ki maa कहां मानने वाली थी हालाकि मेरे हिसाब से देखा जाए तो निर्मला कि मां को सब कुछ पता होगा कि निर्मला किस तरह बीमार हो सकतीं हैं"""" ओर किस तरह नहीं""" ओर किस तरह का काम कर सकती हैं,,,,, ओर किस तरह का नहीं """" कियू कि वो तो maa हैं ! ओर मां तो सबका खयाल रखती हैं कियू एक मां ही तो होती जो सबका खयाल रखती हैं पर मां भी इस तरह से किसी को बेेेटी
"""""""""सताएगी तो कहानी तो बनेंगी ही """""""
अब बात करते ओर क्या क्या कहा कपड़े नहीं धोएं तो ???
अब निर्मला ने तो साफ मना कर दिया तो मां ने ओर भी बाते सुना दी कि """ तू तेरे ससुराल चली जा """" वापस कभी मत आना """" ओर उधर ही मर जाना """ क्या करू साहेब कहानी लिखता हूं जो देखा हैं जो सुना है जो किसी ने सुनाया हैं किसी ने बताया हैं वो ही लिखता हूं !!! क्या करू साहेब कहानी लिखता हूं "" कियू कि आपको ये लगता हैं कि एक मां के बारे में इतना गन्दा लिखते हो शर्म नहीं आती हैं ??? पर क्या करू साहेब जो रियल होता है वो ही लिखता हूं """ ओर अगर आप कह तो दो लाइन ओर लिख देता हूं ,, """ये भी कहा था कि मेरी दो बेटियां हैं वो ही बहुत हैं """"" तेरी जरूरत नहीं हैं """ क्या करू साहेब मजबूर हूं कियू कि में कहानी लिखता हूं जो सच होता हैं वो बताता हूं पर कोई बात नहीं निर्मला ससुराल भी चली जाएंगी !!!
ओर एक दिन आपको ही याद आएगी मां !!!
सॉरी फ्रेंड्स मां के उपर कुछ ज्यादा ही लिख दिया हैं पर क्या करू साहेब कहानी लिखता हूं जो सच होता हैं वो ही लिखता हूं
दोस्तों उम्मीद करता हूं मेरा ब्लॉग आपको पसंद आया होगा ओर किसी को भी बुरा लगा हो तो माफी चाहता हूं इस स्टोरी पर कियू कि एक मां के लिए इतना गन्दा कोई नहीं लिखता पर जो रियल था वो ही आपके सामने प्रस्तुत किया है !
तो फ्रेंड्स आज के ब्लॉग में इतना ही मिलते हैं जल्द ही किसी नेक्स्ट ब्लॉग में जब तक के लिए """"""
"""""जय हिन्द वन्दे मातरम्"""""
Wednesday, September 18, 2019
एक मां अपनी बेटी से कितना प्यार ओर कितना नफरत कर सकतीं आपने कभी सोचा नहीं होगा
मां अपनी बेटी से ये भी कह सकती हैं ,,, तू मर जा मेरे को तेरा मुंह मत दिखाना कभी ,,, क्या आप सोच सकते हैं कि एक मां अपनी बेटी को इस बोल सकती हैं ? जानिए मेरे इस ब्लॉग ! क्या सच में कह सकती हैं ?
हेलो दोस्तो कैसे हैं आप सब लोग में हूं आपका दोस्त दिलीप सिंह उर्फ सिंह साहेब उम्मीद करता हूं आप सब लोग अच्छे होंगे !
ओर उम्मीद करता हूं आपको मेरा ब्लॉग पसंद आएगा !
दोस्तों में आपको एक स्टोरी के माध्यम से एक रियल स्टोरी सुनाता हूं कि एक मां अपनी बेटी से कितना प्यार ओर कितना नफरत कर सकती हैं ? अगर मेरी के इस स्टोरी से किसी भी भाई बहिन या माता पिता किसी को भी मेरी इस कहानी से घर्ना हों तो मुझे माफ़ कर देना ! कियू कि मेरा काम हैं आपको स्टोरी सुनाना पर आप इस स्टोरी को किस नजरिए से देखते हैं या पड़ते हैं आपकी मर्जी इसी लिए पहले से ही माफी चाहता हूं !
तो फ्रेंड्स आज कि स्टोरी स्टार्ट करते हैं,
दोस्तों एक छोटे से गांव में एक (बदला हुआ नाम) निर्मला रहतीं थीं , उसका फैमिली बैकग्राउंड भी ठीक था निर्मला के दो भाई ओर दो बहिने थीं दोनों भाई ओर दोनों बहिने निर्मला से बड़े ही थे , इसलिए निर्मला सबकी लाडली थीं , खासतौर पर अपने पापा और उसके छोटे वाले भाई कि ज्यादा लाडली थीं !
बाकी सब से नॉर्मल ववहार था ओर देखते ही देखते निर्मला कि शादी भी एक नॉर्मल से फैमिली में हो जाती हैं, निर्मला को पति भी बहुत अच्छा मिलता हैं , पर जो अपने जो कर्म होते है उनको तो भगवान पूरा करवा के ही रहता है , निर्मला का पति भी बहुत अच्छा था और उसके ससुराल में भी सब उसको अच्छे ही मिले पर जिसका कर्म ही फुट जाता हैं तो फिर ना ही सुधार सकता हैं ओर ना ही कोई बदल सकता हैं !
1990 कि बात करे तो लड़कियां या लड़की के घर वाले ये ही सोचते थे कि पता नहीं मेरी बेटी को सास कैसी मिलेगी ??
पर अभी 2015 से 2020 बीच कि बात करे तो जो एक मां होती हैं वो यही सोचती हैं कि मेरे को बहू कैसी मिलेगी ??
इसलिए अब वो ही टाइम चल रहा है पर निर्मला के लिए ओर निर्मला कि सास में ऐसा कुछ भी नहीं था ! कि मेरे को बहू अच्छी नहीं मिली हैं या फिर निर्मला को उसकी सास अच्छी नहीं मिलीं !
दोनों सास ओर बहू के बीच अच्छे से बनती भी थीं अब ये स्टोरी 1990 ओर 2015 जैसी कोई बात नहीं थी कि बहू या सास को कोई परेशानी हो !
कियू कि दोनों में अच्छे से बात बन रहीं थीं तो 1990 ओर 2015 कि स्टोरी ही सास ओर बहू के लिए तो बंद हो चुकी थीं , पर क्या करें अपन ने कर्म करके रखें हैं उनको तो पूरा करना ही पड़ेगा !
सास अच्छी मिल गई तो क्या हुआ अपने कर्म को थोड़े ही बदल सकते हैं आखिरकार निर्मला को अपने जो बुरे कर्म किए हुए थे वो पूरे करने ही थे !
जिसने भी अच्छे कर्म किए वो भगवान बन गया पर जिसने बुरे कर्म किए वो तो मिट्टी में ही मिल गया जैसे महाभरात में कर्णं इतना दानवीर ओर कई देवताओं का आशीर्वाद था पर फिर कर्ण ने जो कर्म किए वो तो उसको भुगतने ही पड़े थे ओर आखिरकार में कर्ण के कर्म कर्न को उसकी मृत्यु तक पहुंचा कर ही रखें !
जब इतना बड़ा दानवीर ओर देवताओं के साये में रहकर भी कर्ण अपने आप को बचा नहीं सका तो फिर एक नॉर्मल आदमी अपने आप को कैसे बचा सकता हैं ?
अब बात ये आती हैं कि जब निर्मला ने शादी कि तब बात हो रखीं थीं कि निर्मला को बारह महीने तक वो अपने मायके में ही रहेंगी ! पर हा कभी कभार आ जा सकतीं हैं""" कोई काम हो तो ! पर निर्मला को तो 4 से 5 महीने में ही उसकी मां बोलने लगीं मैं तो भेज दूंगी"""" उसके ससुराल में नहीं रख सकतीं में ! ओर इसी तरह निर्मला को मां हमेशा से डाटने ओर ताने मारती कि भेज दूंगी""""" तेरे को तेरे ससुराल में ! हर एक छोटी मोटी बात पर ही डाटने लग जाती और बात बात पर एक ही शब्द""""" भेज दूंगी तेरे को तेरे ससुराल में "" ओर इसी वजह से निर्मला भी दुःखी होने लगीं और अपने हसबैंड से बोलती कि मां तो मेरे को हर एक बात ये ही बोलती हैं "" ससुराल भेज दूंगी ,, ससुराल भेज दूंगी "" ओर इस तरह कि बाते सुनकर निर्मला का हसबैंड भी परेशान रहने लगा "" निर्मला का हसबैंड ये सोचने लगा कि एक मां अपनी बेटी को इस तरह कैसे बोल सकती हैं ???
आपको क्या लगता है क्या एक मां अपनी बेटी को इस तरह बोल सकतीं हैं ???? अपना जवाब कॉमेंट में जरूर लिखें !!
Thursday, September 12, 2019
जोधपुर MGH हॉस्पिटल ने दी मुझे जिंदगी
MGH हॉस्पिटल ने दी मुझे जिंदगी ब्लॉग by सिंह इस किंग ,
MGH हॉस्पिटल कहा पर हैं ?
MGH हॉस्पिटल का पूरा नाम महात्मा गांधी हॉस्पिटल हैं ! ये हॉस्पिटल मेरे लिए बहुत ही खास है में इसका कारण आगे बताऊंगा ! ये हॉस्पिटल जोधपुर में स्थित हैं , इसका पूरा एड्रेस जालोरी गेट जोधपुर राजस्थान (भारत) में स्थित हैं
MGH ने कैसे दी मुझे जिंदगी ?
MGH हॉस्पिटल मेरी जिंदगी का एक अहम हिस्सा है में जोधपुर में 2014 से ही जॉब कर रहा हूं ओर में जब भी बीमार होता या बुखार खासी जुकाम कुछ भी होता तो मैं MGH में चला जाता हूं ओर मुझे वहा से एक दोबारा जिंदगी मिल गई ऐसा लगता है मुझे कियू कि MGH हॉस्पिटल में जब भी जाता हूं तो मुझे दोबारा वहा पर जाना नहीं पड़ती कियू कि वहा कि दवा मुझे सूट करती हैं ओर में एक ही बार में ठीक हो जाता MGH में नहीं तो मुझे इंजेक्शन कि जरूर पड़ती हैं ओर ना दोबारा आने कि ये मेरा चार साल का एक्सपीरियंस है MGH हॉस्पिटल के साथ ! सो मेरे लिए तो MGH हॉस्पिटल बहुत ही लकी हैं !
MGH में फ्री वितरण होती हैं दवाइयां !
MGH मतलब महात्मा गांधी हॉस्पिटल जितना बड़ा नाम उतना बड़ा काम महात्मा गांधी जी तो चले गए पर हॉस्पिटल उनके नाम पर आज भी चलते हैं , MGH आपको सारी दवा फ्री देता हैं अगर कोई दवा MGH में ना हो तो आप MGH के बाहर मेडिकल हैं आप वहां से भी ले सकते हो
MGH में आपको सिर्फ दस रुपए स्लिप के देने पड़ते हैं ओर किसी भी तरह का पैसा नहीं लगता हैं , पर हा अगर कोई दवा MGH के पास में नहीं होती हैं तब आप बाहर मेडिकल से ले सकते हैं !
चलो में आपको एक स्टोरी सुनाता हूं ! एक इंसानियत के नाते
में एक बार होटल में नाइट ड्यूटी कर रहा था तभी किसी कस्टमबर का कॉल आया हैं कि यहां पर कोई नजदीक में हॉस्पिटल हैं क्या ? मैंने हांजी हैं ना पास में ही हैं , हालाकि जिस कस्त्मबर ने काल क्या था वो कस्टम्बर नहीं था पर कस्टम्बर का ड्राइवर था !
ड्राइवर बोल रहा था कि मेरे हाथों में दर्द बहुत हो रहा है !
फिर उस
कस्टम्बर को भी कॉल क्या कि सर आपके ड्राइवर की तबियत खराब हो रही हैं , कस्टमर भी नीचे आ गया ओर उस कस्टमर ने बोला भाई यहां पर कोई नजदीक में हॉस्पिटल हैं क्या ?
मैंने बोला हैं ना सर नजदीक में ही हैं MGH हॉस्पिटल तो कस्टम्बर बोला भैया आप ही चलो ना हमारे साथ , मैंने बोला ठीक है चलो, वो बोले गाड़ी लेकर चले क्या ?
मैंने बोला नहीं नहीं सर ये नजदीक में ही हैं !
फिर हम लोग MGH में गए ओर सबसे पहले स्लिप कटवानी होती इसी स्लिप के अपने को दस रुपए देने होते हैं बाकी ओर MGH में किसी भी तरह के पैसे नहीं लगते !
फिर हमने स्लिप कटवाने के बाद डॉक्टर से चेक करवाया बट डॉक्टर ने सब कुछ नॉर्मल ही बताया था पर फिर भी चेकअप के बाद कुछ टैबलेट तो दे ही दी थीं !
डॉक्टर ने कहा कि हो सकता हैं आपने लोंग ड्राइव क्या हैं उसकी वजह से भी हो सकता हैं कि आपके हाथों में पेन हो !
फिर हम लोग वापस होटल में आ गए थे ओर में भी अपनी ड्यूटी पर तैनात हो गया !
सुबह हुई ओर वो कस्टमम्बर जाने लगे तो उन्होंने मुझे बुलाया और कुछ टिप्स दी मैंने एक बार तो मना कर दिया फिर भी उन्होंने जबर्दस्ती मेरे हाथ में थमा कर चल दिए !
भगवान उनकी रक्षा करें कियू कि मैंने ऐसे ऐसे आदमी भी देखे हैं जो मेरे को कुछ टिप्स दे रहे थे पर मैंने उनको साफ मना कर दिया कि में आपसे पैसे नहीं लूंगा ! कियू कि जिसका मन होगा वो अपने आप ही दे देगा ओर जो नहीं देना वाला होगा उसके आप लाख काम भी कर लो तो भी नहीं देगा मैंने ये लाइन इसलिए लिखीं है कि जिसका मन सचा होगा वो दे देगा पर अगर काम करवाके फिर भी बड़ी मुश्किल से दस रुपए भी दे तो में नहीं लेता था !
ओर कुछ लोग तो इतनी बद तमिजी से बात करते उनकी कोई हद ही नहीं होती पर कुछ लोग तो इतने अच्छे होते हैं कि अगर आप उनसे कितने ही छोटे हो या फिर कितना हीं छोटा काम कर रहे हो फिर भी आपको वो आप ही कह कर ही बुलाते हैं !
ये मैंने मेरी खुद कि लाइफ में भी बहुत देखा हैं ओर ये होता भी हैं , आप हमें अपनी प्रतिक्रिया कॉमेंट के रूप में जरूर प्रकट करे !
हमें बताए कि कितना सच है ओर कितना झूठ ?
तो फ्रेंड्स आज के ब्लोग्स में इतना ही मिलते हैं जल्द ही किसी नेक्स्ट ब्लॉग में जब तक के
""""""""जय हिन्द वन्दे मातरम्"""""""
MGH में फ्री वितरण होती हैं दवाइयां !
MGH मतलब महात्मा गांधी हॉस्पिटल जितना बड़ा नाम उतना बड़ा काम महात्मा गांधी जी तो चले गए पर हॉस्पिटल उनके नाम पर आज भी चलते हैं , MGH आपको सारी दवा फ्री देता हैं अगर कोई दवा MGH में ना हो तो आप MGH के बाहर मेडिकल हैं आप वहां से भी ले सकते हो
MGH में आपको सिर्फ दस रुपए स्लिप के देने पड़ते हैं ओर किसी भी तरह का पैसा नहीं लगता हैं , पर हा अगर कोई दवा MGH के पास में नहीं होती हैं तब आप बाहर मेडिकल से ले सकते हैं !
चलो में आपको एक स्टोरी सुनाता हूं ! एक इंसानियत के नाते
में एक बार होटल में नाइट ड्यूटी कर रहा था तभी किसी कस्टमबर का कॉल आया हैं कि यहां पर कोई नजदीक में हॉस्पिटल हैं क्या ? मैंने हांजी हैं ना पास में ही हैं , हालाकि जिस कस्त्मबर ने काल क्या था वो कस्टम्बर नहीं था पर कस्टम्बर का ड्राइवर था !
ड्राइवर बोल रहा था कि मेरे हाथों में दर्द बहुत हो रहा है !
फिर उस
कस्टम्बर को भी कॉल क्या कि सर आपके ड्राइवर की तबियत खराब हो रही हैं , कस्टमर भी नीचे आ गया ओर उस कस्टमर ने बोला भाई यहां पर कोई नजदीक में हॉस्पिटल हैं क्या ?
मैंने बोला हैं ना सर नजदीक में ही हैं MGH हॉस्पिटल तो कस्टम्बर बोला भैया आप ही चलो ना हमारे साथ , मैंने बोला ठीक है चलो, वो बोले गाड़ी लेकर चले क्या ?
मैंने बोला नहीं नहीं सर ये नजदीक में ही हैं !
फिर हम लोग MGH में गए ओर सबसे पहले स्लिप कटवानी होती इसी स्लिप के अपने को दस रुपए देने होते हैं बाकी ओर MGH में किसी भी तरह के पैसे नहीं लगते !
फिर हमने स्लिप कटवाने के बाद डॉक्टर से चेक करवाया बट डॉक्टर ने सब कुछ नॉर्मल ही बताया था पर फिर भी चेकअप के बाद कुछ टैबलेट तो दे ही दी थीं !
डॉक्टर ने कहा कि हो सकता हैं आपने लोंग ड्राइव क्या हैं उसकी वजह से भी हो सकता हैं कि आपके हाथों में पेन हो !
फिर हम लोग वापस होटल में आ गए थे ओर में भी अपनी ड्यूटी पर तैनात हो गया !
सुबह हुई ओर वो कस्टमम्बर जाने लगे तो उन्होंने मुझे बुलाया और कुछ टिप्स दी मैंने एक बार तो मना कर दिया फिर भी उन्होंने जबर्दस्ती मेरे हाथ में थमा कर चल दिए !
भगवान उनकी रक्षा करें कियू कि मैंने ऐसे ऐसे आदमी भी देखे हैं जो मेरे को कुछ टिप्स दे रहे थे पर मैंने उनको साफ मना कर दिया कि में आपसे पैसे नहीं लूंगा ! कियू कि जिसका मन होगा वो अपने आप ही दे देगा ओर जो नहीं देना वाला होगा उसके आप लाख काम भी कर लो तो भी नहीं देगा मैंने ये लाइन इसलिए लिखीं है कि जिसका मन सचा होगा वो दे देगा पर अगर काम करवाके फिर भी बड़ी मुश्किल से दस रुपए भी दे तो में नहीं लेता था !
ओर कुछ लोग तो इतनी बद तमिजी से बात करते उनकी कोई हद ही नहीं होती पर कुछ लोग तो इतने अच्छे होते हैं कि अगर आप उनसे कितने ही छोटे हो या फिर कितना हीं छोटा काम कर रहे हो फिर भी आपको वो आप ही कह कर ही बुलाते हैं !
ये मैंने मेरी खुद कि लाइफ में भी बहुत देखा हैं ओर ये होता भी हैं , आप हमें अपनी प्रतिक्रिया कॉमेंट के रूप में जरूर प्रकट करे !
हमें बताए कि कितना सच है ओर कितना झूठ ?
तो फ्रेंड्स आज के ब्लोग्स में इतना ही मिलते हैं जल्द ही किसी नेक्स्ट ब्लॉग में जब तक के
""""""""जय हिन्द वन्दे मातरम्"""""""
Friday, September 6, 2019
मेरा पुष्कर का ट्युर
हेल्लो दोस्तों कैसे हैं आप सब लोग में हूं आपका दोस्त दिलीप सिंह उर्फ सिंह साहेब उम्मीद करता हूं आप सब लोग अच्छे होंगे !
दोस्तों में दिल्ली गया था, ओर में कुछ दिल्ली की बाते बताने वाला हूं , दिल्ली में कहा गया था, और क्या देख के आया था, कैसे गया था , मेरा सफर कितने दिन का था, ये सारी बातें करेंगे इस ब्लॉग में तो बने रहिए मेरे साथ एंड तक और आपका कोई सवाल हो तो हमें कॉमेंट जरूर करें हम आपके सवाल का रिप्लाई जरूर करेंगे , तो फ्रेंड्स चलिए आज का ब्लॉग स्टार्ट करते हैं, ओर उम्मीद करूंगा कि आपको मेरा ब्लॉग पसंद आएगा ,
कब गया था मैं दिल्ली ?
(में इससे पहले पुष्कर गया था तो वहां का विवरण आपके साथ शेयर करूंगा तो एक हो सकता दिल्ली का ब्लॉग नेक्स्ट ब्लॉग में मिलेगा )
फ्रेंड्स में जोधपुर में जॉब करता हूं, ओर कुछ दिनों के लिए में मेरे गांव गया था ! 23 अगस्त 2019 को में मेरे गांव चला गया था , ओर इसी बीच मुझे जाना रूणेजा ओर मैंने सुना था रुनेजा में बहुत क्राउड है ,ओर इस बार मेरी मां भी जाके आई थीं तो बता रही थीं बहुत क्राउड हैं इस बार तो, इसलिए मैंने मन बनाया कि ,
![]() |
ये पिक हर्ष नाथ जी के मंदिर का हैं सीकर जिले में स्थित हैं |
रूनेजा नहीं तो पुष्कर चलते हैं , हालाकि रूणेेजा भी मै कभी नहीं गया था , पर इस बार नहीं पिछली बार जरूर जाऊंगा , ओर रूणेजा जाने का विचार भी मेरा नहीं था मेरी खुशी का था, फिर मैंने सोचा रूणेजा की बजाय पुष्कर चलते हैं , ओर मेरी खुशी भी इस बात से सहमत हो गई थी !
अब हम 24 अगस्त 2019 को सुबह 10:00 बजे पुष्कर के लिए रवाना हो गए थे में, मेरी खुशी , मेरी भतीजी, मेरा भतीजा, छोटसा, ओर एक अन्य गांव का भाई , ओर एक ड्राइवर , हम कुल मिलाकर 7 मेम्बर हो चुके थे और हमारे पास थीं अल्टो इसी हम सब पुष्कर के लिए रवाना हो गए थे !
कितने घंटे लगे कितने किलोमीटर था पुष्कर ?
दोस्तों हम लोग 10: 00 बजे निकल तो चुके थे, पर पुष्कर पहुंचते पहुंचते 4 बजे गए थे , कियू कि आराम से मजे करते हुए गए थे , हालाकि पुष्कर मेरे गांव से करीबन 160 किलोमीटर के करीबन ही होगा फिर भी हम लोगो ने 4 बजा दिए थे, हमें पुष्कर पहुंचने में करीबन 6 घंटे लग चुके थे !
कहां पर है पुष्कर ?
पुष्कर अजमेर जिले राजस्थान में स्थित हैं , आप इसको पर्यटक स्थल के रूप में भी मान सकते हैं, पुष्कर की सबसे खास बात यह है कि पूरे भारत में भगवान ब्रह्मा जी का मंदिर कहीं पर भी नहीं हैं वो सिर्फ पुष्कर में ही स्थित हैं,
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ये पिक पुष्कर में जाते समय रास्ते का हैं !क्या हैं पुष्कर में देखने के लिए ? |
सबसे पहले आप सरोवर देख सकते ओर ज्यादातर सबसे पहले सरोवर को ही देखने जाते हैं , ओर सरोवर में स्नान करते हैं, मैंने भी स्नान क्या था , ओर करना भी जरूरी है , कियुकी लोग कहते हैं इस सरोवर में स्नान करने से सारे पाप धुल जाते हैं, ओर मेरे गांव के दोनों ही साथियों ने भी सरोवर में नहाने का आनंद लिया और मैंने भी बहुत मज़े लिए! पर लेकिन आप वहां पर वीडियो या फोटो नहीं खींचे तो बेटर ही रहेगा वरना आपका मोबाइल जब्त भी क्या जा सकता हैं, तो इस बात ध्यान जरूर रखें !
सरोवर में नहाने के बाद आप मेले में घूमते घूमते आप ब्रह्मा जी के दर्शन भी कर लीजिए ! आपको ब्रह्मा जी के मंदिर में आपको बहुत सारे मंदिर देखने को मिलेंगे तो आप वहां पर सभी के दर्शन कर सकते , यहां पर टिकट नहीं लगता, ओर लगना भी नहीं चाहिए, कियुकी पूरे हिन्दुस्तान में एक ही मंदिर हैं ब्रह्मा जी का ओर भगवान के दर्शन के लिए कैसा टिकट !
ओर भी आपको यहां पर बड़े बड़े मंदिर देखने को मिलेंगे मेरे को तो ज्यादा टाइम ओर ज्यादा जानकारी नहीं होने के कारण कम ही घूमा था , कियुकी हम लोग 4 बजे तो पहुंचे ही थे !
![]() |
ये पिक पुष्कर का हैं |
अब आप इन मंदिरों में दर्शन के बाद आप मेले अच्छे से घूम सकते हैं मेला भी बहुत बड़ा लगता हैं , आपको इस मेले में फैंसी आइटम जो चाहे वो मिल जाएगा, ओर भी आपको यहां पर , तलवारें, घरेलू आइटम, चमड़े के जूते, फैंसी आइटम में तो सब कुछ मिल जाएगा !
मेले में घूमने के बाद अब आपको ओर भी वहां पर मंदिर देखने को मिलेंगे आप इन मंदिरों में भी घूम सकते हैं, मेरे को तो ज्यादा टाइम नहीं था और ज्यादा जानकारी भी नहीं थीं , इसलिए ज्यादा नहीं घुमा था, पर आप जब भी जाएं तो टाइम पर ही जाएं ताकि आप अच्छे से घूमने का आनंद लें सके !
तो आप भी एक बार पुष्कर जरूर जाएं और ब्रह्मा जी दर्शन जरूर करें ओर मेले घूमने का आनंद जरूर ले ओर हो सके तो फ्रेंड्स के साथ जाएं तो ओर भी आपको ज्यादा मजा आएगा !
वापस कब तक पहुंचे थे ?
फ्रेंड्स अब हम लोग अच्छे से घूम चुके थे हमें पुष्कर में करीबन 7:15 हो चुके थे , ओर हम लोग रवाना हो गए थे पर पुष्कर से थोड़ी ही दूर हमने एक विशाल मंदिर देखा जो बहुत हीं उचाई पर दिख रहा था पर हमने उस मंदिर में जाने का मन बनाया पर हमें पुष्कर में ही अंधेरा हो चुका था फिर भी हम लोगों ने विचार कर ही लिया था ! हमने गाड़ी पार्क कर दी और मंदिर की तरफ चल दिए !
कोनसा मंदिर था ?
उस मंदिर का नाम सावित्री माता का मंदिर हैं ! अभी हम सब लोग सीढ़ियां चढ़ने लगे , पर में तो आपको यहीं कहूंगा आप लिफ्ट से ही जाएं तो ही आपके लिए बेटर रहेगा ! कियू की में आपसे बता देता हूं कि में मेरी जिंदगी में पहली बार इतनी सीढ़ियां चढा था में मेरे अनुमान से बताऊं तो करीबन 2000 सीढ़ियां होगी सावित्री माता के मंदिर कि पर लेकिन फिर भी हम सब लोग चढ़ ही गए थे , मै, मेरी खुशी, मेरी भतीजी, छोट्सा ओर मेरा एक छोटा सा भतीजा जिसकी उम्र सिर्फ 7 साल की होगी वो भी करीबन 2000 सीढ़ियां चढ़ चुका देखिए माता जी किर्पा !
गांव के दोनों भाई ओर छोटसा तो आगे निकल चुके थे पर हम लोग तो पीछे छूट चुके थे , में , मेरी खुशी, मेरी भतीजी, ओर मेरा भतीजा पर देखिए एक साथ साल के भतीजे ने ये कभी नहीं कहा कि में थक गया हूं , पर मेरे तो पूरा शर्ट पसीने से लथपथ हो गया था ओर मेरी खुशी और भतीजी का भी बुरा हाल हो गया था सीढ़ियां चढ़ चढ़ कर !
रस्ते में करीबन दस जगह तो उनको बैठना पड़ा था ओर मेरे को तो बोलो भी नहीं जा रहा था इतनी सासे फूलने लग गई थी , ओर उधर, उपर से ओर आवाज लगा रहे थे कि मंदिर का दरवाजा बंद हो रहा है जल्दी आओ पर मेरे मुंह में से तो आवाज भी नहीं निकल रहीं थीं कि , हा में आ रहा हूं इतना भी नहीं बोला जा रहा , ओर मेरी खुशी और मेरी भतीजी भी मेरे से पीछे छूट चुकी थीं , कियू कि इन्होंने मुझे बोल दिया कि आप जाओ हम अभी ओर नहीं चल सकती !
पर फिर भी मेरे पीछे पीछे चली आ रही थी ओर आखिर में हम सब लोगों ने सावित्री माता जी दर्शन कर ही लिए थे ! ओर फिर करीबन आधा घंटे तक हम सब लोग उपर ही बैठे रहे ! पर जैसे ही हम लोग वहां से सीढ़िया उतरने लगे तो हमारे पैर को हमने इतना सम्भाल सम्भाल कर रख रहे थे कि कहीं हम गिर ना जाए ! हम लोगों ने एक दूसरे का हाथ पकड़ लिया और धीरे धीरे नीचे उतर गए ! कियू कि हम सब लोग इतनी सीढ़ियां कभी चढ़ी नहीं थीं तो हमारे पैर काम ही नहीं कर रहे थे ! इसलिए आराम से उतरे थे ! पर में तो आपको यहीं कहूंगा आप लिफ्ट से ही जाएं आपके लिए बेस्ट रहेगा !
पर लेकिन एक बात तो हैं हम सब लोग थक चुके थे पर मेरा छोटासा भतीजा सात साल का उसने ये तक नहीं बोला कि में थक चुका हूं कियु हम सब का पसीना छूट गया था , पर एक सात साल का बच्चा 2000 सीढ़ियां चढ़ जाए और कुछ ना बोले , देखो माताजी जी किर्पा ,हम लोगों कि हालत तो फ्रेंड्स ऐसी हो गई थी कि एक कदम भी आगे नहीं उठा सकते थें !
फ्रेंड्स अब हम सब लोग नीचे आ गए थे ओर वापस रवाना होने लगें हम लोगों वहा पर ही 9:00 बज चुके थे ओर वापस घर आने में तो ज्यादा टाइम तो नहीं लगा था पर खाना वाना खाया फिर आराम से घर पर आ गए थे !
तो फ्रेंड्स आज के ब्लॉग में इतना ही मिलते हैं जल्द ही किसी नेक्स्ट ब्लॉग में जब तक के लिए
"""""""""""जय हिन्द वन्दे मातरम्"""""""""
ओर आपका कोई भी सवाल हो तो हमें कॉमेंट कीजिए हम आपका रिप्लाई जरूर करेंगे !
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