Thursday, July 25, 2019

गांव के लोग किस तरह करते हैं???

दोस्तों आज का ब्लोग्स जो हैं ,  गांव के बारे मै है गांव के लोग क्या करते हैं , कहां जाते है , किया काम करते हैं, कितने घंटे काम करते हैं , कितने घंटे सोते हैं , मोर्ननिग  मै कितनी बजे उठते हैं, और भी इसी तरह की इंटरस्टिंग बाते करेंगे  तो लास्ट तक बने रहिए हमारे साथ!!


तो फ्रेंड्स चलिए आज का ब्लोग्स स्टार्ट करते हैं , अगर आपको इस ब्लोग्स मै थोड़ी सी भी बाते अच्छी लगती हैं तो कॉमेंट बॉक्स मै लाइक जरुर  राइट करना ताकि आपके लिए ऐसी ही ब्लोग्स बनाते रहे !


            हेल्लो दोस्तों कैसे है आप सब लोग मै हूं आपका दिलीप सिंह उर्फ सिंह साहेब, दोस्तों उम्मीद करता हूं आप सब लोग अच्छे होंगे, और उम्मीद करता हूं कि आपको मेरा ब्लॉग पसंद आएगा !!

दोस्तों बात कर रहे है गांव के बारे मै शुरू से ही स्टार्ट करते हैं ,सुबह  के बजते हैं  चार और बोल जाता हैं मुर्गा कुकड़ कु, और गांव के जितने भी बुजुर्ग लोग होते हैं , सब अपने बिस्तर पर थोड़ी देर के लिए बैठ जाते हैं , बीड़ी, तम्बाकू जो भी पीना होता है पी लेते हैं ! 



 फिर बिस्तर छोड़ कर फ्रेश होने को चले जाते है, राम का नाम जपते जपते फ्रेश होने चले जाएंगे , इसी बीच जो भी बड़ी बहू घर में होती हैं वो भी उठ जाती हैं साथ में सास भी उठ जाती हैं, पांच बजे के करीबन सास और बहू दोनों ही उठ जाती हैं , जो लोग समझदार होते है , वो सबसे पहले उठकर जो गाय भैंस होती हैं ,उनका  गोबर साफ करते हैं, फिर घर का झाड़ू  निकालते है, फिर चाय बनाते हैं ,इतने  मै 5:30 हो जाता हैं और घर के करीबन सारे मेंबर उठ जाते हैं !

और  कोई कोई लड़के  छः से साढ़े बजे तक भी उठते है और कोई कोई तो सात भी बजा देते हैं , और इसी बीच मां चाय बना लेती हैं, और सब चाय पीते है छह बजे से सात बजे तक ,वैसे  चाय पांच से साढ़े पांच बजे तक रेडी हो जाती हैं पर बच्चे उठते हैं , जितने सात तो बज ही जाते हैं चाय पीते पीते !! पर लेकिन जो छोटे छोटे बच्चे होते हैं वो तो पांच बजे ही उठ जाते हैं , पर उनकी मां दूध पिलाकर वापस सुलाती हैं, फिर भी  घंटे भर सोएंगे और फिर उठ जाएंगे !!

अब जितने भी स्कूल जाने वाले बच्चे होते हैं उनके लिए टिफिन तैयार करना होता हैं तो मां अपने बच्चो का टिफिन तैयार करके स्कूल भेजती हैं, पर गांव मै पहले क्या हुआ करता की चाय के साथ मै रोटी  खाते थे!       पर लेकिन अब शायद ही कोई होगा जो चाय के साथ में रोटी खाता हो,अब  इसी बीच जो लोग खेत पर काम करने जाते वो भी चले जाते हैं ,कोई कोई तो पांच बजे जाकर ही खेत पर काम करने लग जाते हैं ,क़ियुकी  गांव में तो सब खेती ही करते है , पर कोई कोई तो आठ से नौ बजे ही पहुंच पाता हैं , कीयुकि अगर आपके घर में काम करने वाला और भी कोई होगा तो आप पांच बजे ही चले जाओगे , अगर आप अकेले हो तो आप नो बजे तक ही पहुंच पाएंगे, कीयूकि घर पर भी बहुत सारे काम होते हैं , घर की साफ सफाई , गाय भैंस को चारा डालना ,हालाकि  गाय भैंस को चारा तो पांच बजे ही डालना पड़ता हैं,,

पर फिर भी बहुत सारे काम  होते है , पानी भरना , रोटी बनाना, बच्चो का टिफिन तैयार करना, छोटे बच्चे होते हैं तो उनको भी संभालना पड़ता हैं, इसके अलावा भी छोटे मोटे काम तो होते ही रहते हैं, कभी कभार ऐसा       कहते हुए सुना ही होगा की ,, घर काम तो पूरा दिन मै भी नहीं होता करे जितना कम हैं ,,


रचके की सब्जी कैसे होती हैं ???

अब 8 से 9 बजे तो सब लोग खेत पर जाकर  अपने अपने खेतों में काम करने लग जाते हैं, खेतों में करीबन दो फसल ही बोते है , एक खरीफ की ओर दूसरी रबी की फसल , गरमी के टाइम मै कोई फसल बो देते हैं ,कुछ  नहीं बोएंगे  , ज्वार या फिर रचका ही बो देंगे,रचका तो किसी भी टाइम लगा सकते हैं, अगर रचका  एक बार बो दिया तो रचका तीन साल तक रहेगा ,बस  उसको पानी पिलाते रहो और ओर काट  काट कर अपने घर मै कोई भी मवेशी हो उसको खिलाते रहो ,रचके को गाय, भैंस, बकरी, सब खाते हैं, ओर हा रचके को गाय भैंस ही नहीं बल्कि उसकी सब्जी भी बनाकर खा सकते हैं, बहुत  ही टेस्टी भी होती हैं, मेरे को तो बहुत पसंद हैं, अगर आपने भी कभी रचके की सब्जी खाई हैं तो कॉमेंट करना की कैसी लगती हैं आपको ? ओर अगर आपने कभी नहीं खाई हैं तो जरूर खाईये ओर कैसी लगती हैं कॉमेंट मै जरूर टाइप कीजिए कि आपको किस तरह लगती है??




 गांव वाले खाना कब  खाते हैं !!

       दोस्तों अगर हम खाने की बात करे गांव वालों के बारे मैं , तो सुबह तो सिर्फ चाय ही पीते हैं ,कोई  होता है जैसे उसके फैमिली बड़ी होती है तो नाश्ता भी बनाते हैं पर ज्याातर तो सुबह चाय ही पीते हैं , और खाने की बात की जाएं तो गांव मै तीन बार खाना खाते हैं ,अगर  टाइम पर खाते है तो बाकी दो टाइम तो खाते ही हैं ,जैसे  ही खेत पर काम करके आते हैं ,तो  सबसे पहले खाना ही खाते हैं , अगर कोई सुबह जल्दी खेत पर काम करने चला गया हैं तो ,वो  आदमी 10 से 11 बजे के बीच मै खाना खाने लग जाएंगे, और अगर जो 9 बजे जाता है, तो फिर वो खाना खा कर ही जाएगा , इसी तरह 10 बजे खाने वाला 2 से 3 बजे के करीबन और खाना खा लेता हैं , और फिर शाम को ही खाना खाते हैं , शाम मै करीबन गरमी की बात करे तो 8:00 से लेकर 10:00 बजे तक खाना हो जाता हैं, अगर हम सर्दी की बात करे तो  7:00 से लेकर 8:30 बजे तक खाना हो जाता हैं , पर एक बात तो हैं अगर आप खेत पर काम कर रहे हैं , और खेत पर ही खाना आ गया हो तो खाना का मजा ही कुछ ओर हो, जहां आप दो रोटी खाते वहां आप  तीन से चार रोटी खा जाएंगे , खेत पर बैठकर खाना खाने की बात ही कुछ ओर होती हैं , 

  

दोस्तों आज के ब्लॉग मै इतना हीं मिलते हैं जल्द ही किसी नेक्स्ट ब्लॉग जब तक के लिए, """जय जवान  जय किसान""" """जय हिन्द वन्दे मातरम्""



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